SAMEER GK

Knowledge, technical gadget, motivation,

Saturday, March 16, 2019

DONDI |डौंडी

DONDI


Dondi is a small town of balod dist in chhattisgar state of india the town is nagar panchayat since 2003 it has head qurtare of dondi tehsil .it is located 31 km towards south from district head qurter balod it is a tahsil head qurter.there are 15 wards in dondi nagar panchayat

Map of Dondi, Chhattisgarh 491228|Dondi map,chhattisgarh 491230
dondi map chhattisgarh 491230

Coordinate                                :20°28'59.0"N 81°05'11.0"E


Country                                     : INDIA
State                                          : chhattisgar
District                                      : BALOD
Elevation                                   :412 meters
Population (2011)                    : 8,042 (census 2011)
Telephone code/STD                : 07748
Languages                          : HINDI,CHHATTISGARI,
Time zone                                  :UTC+5:30(IST)
Pin                                             :491230
Vehicle registration                 CG-24
Assemblyconstituency :DONDILOHARA ASSEMBLY(60)
 MLA                            :  Smt ANILA BHEDIYA(since 2013)
Lok sabha constituency : KANKER Parliamentary constituency
Parliament MP                          : VIKRAM SING USHEDI
Nagar panchayat                        : DONDI
Precedent                           : KHILENDRA BHUARYA (since 2014)
Police station                             : DONDI
Post office                                  ; DONDI (491230)
Division code                             : 37


DONDI NAGAR


DONDI block is a tribe area, hear is the multiplicity of two type of tribes  residing  GOND and HALBA ,apart from this ,there are more people living here.
There is a lot of government office here like Police station ,Janpad panchayat , Irrigation office ,PHE office ,BO office ,Tahsil office ect and many school and one gov. collage kangala manjhi collage .
The main business of the people here is to make agriculture

Tample

JIMIDARIN MANDIR DONDI

     THE JIMIDARI MANADIR is in dondi .this is a very popular tampale ,for the people here it is a symbol of belief and faith there is also DANTESHWARI TEMPLE along with this .and along with the shitala tample is also there .

DURGA DEVI MANDIR DONDI

    The DURGADEVI MANDIR   is in dondi main rode dugamandir chok.

RAM MANDIR

      THE RAM MANDIR  is in dondi main rode ward no. 10 nearby Rani talab

---------

Thursday, January 31, 2019

Veer Narayan shing/ शहीद वीर नारायण सिंह

                  शहीद वीर नारायण सिंह

जन्म : 1795 सोनाखान छत्तीसगढ़

मृत्यु  : 1857

पिता :  रामसाय

स्थान : सोनाखान छत्तीसगढ़ के पूर्व की ओर रायपुर जिले के

            तहसील बलोदा बाजार वर्तमान स्थित है एक आदिवासी  बाहुल गांव!
shahid veer narayan|shahid veer narayan singh ki jivani
shahid veer narayan singh 

          
         ' जोंक नदी' के प्रवाह स्थल  'कुर्रुपाट डोंगरी' के नीचे स्थित "सोनाखान" के जमीदार 'रामसाय' जिन्होंने 1818 से 1819 के दौरान अंग्रेजों तथा भोंसले राजाओं के विरुद्ध तलवार उठाई थी हालांकि तत्कालीन कैप्टन मैक्सन  ने विद्रोह को दबा दिया उस  बिंझवार जमीदार के यहां जन्मे नारायण सिंह अपने पिता के समान ही दयावान ,निडर, वीर, साहसी व न्याय प्रिय थे!
      
   नारायण सिंह के पूर्वज गोंड जाति के थे तथा बताया जाता है उनके पूर्वज सारंगढ़ के जमीदार के वंश के थे इनके पूर्वजों ने गोंड जाति से बिंझवार जात में जाती परिवर्तन किया!

  बिंझवार जमीदार  इष्ट देवता कुपाठ देव की पूजा करते  थे जो सोनाखान के पश्चिम में  स्थित कुरूपाट डोंगरी में निवास करते हैं कुर्रुपाट डोंगरी से पूरा सोनाखान एक नक्शे के समान प्रतीत होता है  यहां एक स्थान  ऐसा है जहां 12 महीने पानी रहता है! 
स्थानी निवासियों के अनुसार आज भी दशहरा उत्सव के दिन पुराने गांव 1 नए   बसे गांव के लोग कुर्रुपाट में पूजा करते हैं इसी पहाड़ी के बाजू में  जोंक नदी कल कल करती  बहती है!

 1830 में पिताजी रामसाय जी की मृत्यु हो गई और 35 साल की उम्र में नारायण सिंह ने पिताजी की जमीदारी ग्रहण की  उनकी  जमीदारी 70 गांव में थी!

       "एक क्रांतिकारी का इतिहास सामंतवाद और अंग्रेज
      साम्राज्यवाद के खिलाफ एक जीवन प्राण की वीर गाथा"
shahid veer narayan singh ki jivani| शहीद वीर नारायण सिंह
Add shahid veer narayan singh 

 छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी

 भारत देश ब्रिटिश ब्रिटिश शासन का गुलाम हो चुका था साथ ही साथ साहूकारों एवं महाजनोंका शोषण भी ग्रामीण किसानों के ऊपर बढ़ता जा रहा था!
1854 में ब्रिटिश शासन द्वारा नए ढंग से  "टकोली "  लागू किया गया इसे नारायण सिंह ने जनविरोधी एवं दमनकारी कहकर कड़ा विरोध किया तथा रायपुर के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर इलियट के द्वारा नारायण सिंह का विरोध किया गया  इस वजह से नारायण सिंह अंग्रेजों के विरोधी हो गए!
1956 में आकार व सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई तथा ग्रामीण किसानों में भूखमरी के शिकार हो गए तत्कालिक साहूकारों एवं लालची महा जनों के लिए यह स्थिति अवसरवादी हो गई
 जनता की भुखमरी और  परेशानियों को देख कर नारायण सिंह ने कसडोल के महाजन से अनाज मांगा तथा ब्याज देने व फसल होने पर वापसी की शर्त पर अपनी बात रखी किंतु अनाज देने से महा जनों ने साफ इनकार कर दिया!
         तब सभी गांवों की मुखिया को कुर्रुपाट  मैं एकत्र कर नारायण सिंह ने सभी लोगों को एक स्वर में लड़ाई करने के लिए तैयार किया तथा नारायण सिंह के नेतृत्व में सभी एक साथ कसडोल की ओर चल पड़े!
" भुखसे कोई नहीं मरेगा ,भले ही लड़ाई के मैदान में लड़कर मरेंगे!"
shahid veer narayan singh ki jivani|shahid veer narayan singh ki jivani in hindi
छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी


 नारायण सिंह ने कसडोल की व्यापारी माखन के अनाजों से भरे गोदाम का ताला तोड़  अनाज निकालकर ग्रामीणों में बटवा दिया!
यह था जनता का जनता के लिए संग्राम!
व्यापारियों ने इसकी शिकायत  डिप्टी कमिश्नर से कर दी तथा डिप्टी कमिश्नर ने गिरफ्तारी वारंट नारायण सिंह के लिए निकाल दी
24 अक्टूबर 18 56 में  नारायण सिंह को संबलपुर से गिरफ्तार कर रायपुर जेल में बंद कर दिया गया!

फिर 18 57 में देशभर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ उग्र आंदोलन की शुरुआत हो गई जिसमें झांसी की रानी ,तात्या टोपे ,नाना साहेब नेतृत्व कर रहे थे इसी बीच विद्रोह की खबर रायपुर जेल तक पहुंची और वीर नारायण सिंह अंग्रेजों को भगाने एवं साहूकारों महाजन ओं  के शोषण से आजादी दिलाने के लिए  आंदोलित हो उठे!
 कुछ देशभक्त जेल कर्मियों की मदद से कारागार के बाहर तक सुरंग से तीन साथियों के साथ नारायण सिंह फरार होने में कामयाब हो गए 

जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने 500 सैनिकों की एक बंदूकधारी सेना तैयार की तथा 20 अगस्त 18 57 को सोनाखान में स्वतंत्रता का बिगुल बजा दिया!
डिप्टी कमिश्नर एलियट ने स्मिथ के नेतृत्व में सेना की एक टुकड़ी सोना खान की और भेजी अंग्रेजों ने सोनाखान में घुसकर पूरे नगर को आग लगा दी नारायण सिंह ने कुर्रुपाट पहाड़ी में शरण ले ली गौरील्ला लडाई चलता रहा वीर नारायण सिंह ने अपनी वीरता बहादुरी से अंग्रेजों का मुकाबला किया और अंग्रेजों को बहुत परेशान किया और अपने आखिरी दम तक बहादुरी से लड़ते रहे!
सुरेंद्र साए
वीर सुरेंद्र साय स्टांप

संबलपुर के जमीदार सुरेंद्र साए को छोड़कर सभी जमीदारों ने अंग्रेजों का साथ दिया तथा  वीर नारायण के साथ गद्दारी कर दी जमीदारों की विश्वासघात के कारण इतने बड़े संघ को पराजय झेलना पड़ा अंग्रेज सिपाहियों से लड़ते लड़ते वीर नारायण का गोला-बारूद खत्म हो गया और वीर नारायण सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया  उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया और अंत में उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया!



         10 दिसंबर 18 57 को रायपुर के चौराहे पर वीर  नारायणसिंह  को फांसी दे दी गई! बाद में उनके शव को तोप से उड़ा दिया गया!


,'महानदी की घाटी और छत्तीसगढ़ के माटी के महान सपूत  शहीद वीर नारायण को राज्य का प्रथम स्वतंत्रता सेनानी होने का गर्व प्राप्त है!'



शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी
छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी
 चाहते तो  अंग्रेजों के  राज में  भी आराम की जिंदगी बिताते किंतु उन्होंने आजादी को चुना और अंग्रेजों से बगावत की!
पीड़ित जनता और देश की आजादी के लिए  सामंती शोषण और साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ते लड़ते वीर नारायण   सिंह शहीद हो गए!


सम्मान:
     प्रथम स्वतंत्रता सेनानी:
                 गोंडवाना के शेर शहीद वीर नारायण सिंह को छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी का गौरव प्राप्त है!
shahid veer narayan singh ki jivani
शहीद वीर नारायण स्मारक



    जयस्तंभ चौक रायपुर:
                  जिस जगह पर वीरनारायण सिंह को फांसी दी गई थी वहां स्वतंत्रता के पश्चात जयस्तंभ चौक का निर्माण किया गया जो आज भी छत्तीसगढ़ के उस वीर सपूत की याद दिलाते हैं!
जयस्तंभ चौक रायपुर
जयस्तंभ चौक रायपुर


     पोस्टल स्टांप:
                 19 87 को शहीद वीर नारायण सिंह को श्रद्धांजलि देने  के लिए उनकी 130 बरसी पर 60 पैसे का स्टांप जारी  किया गया जिसमें  शहीद वीर नारायण सिंह को तोप के आगे  बांधे दिखाया गया है!
Postal stamp shahid veer Narayan sing
postal stamp shahid veer Narayan sing 




     अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम:
                  2008 में उनके सम्मान में रायपुर क्रिकेट संघ ने शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय  क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कराया जोकि कोलकाता के ईडन गार्डन के  बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा स्टेडियम है जिसमें  एक बार में 65000 दर्शन बैठ सकते हैं!   
shahid-veer-narayan-international-cricket-stadium-raipur
शहीद वीर नारायण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम रायपुर



      राजा राव पठार  मेला:
                  छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को राजधानी रायपुर से 98 किलोमीटर दूर रायपुर जगदलपुर नेशनल हाईवे पर जिला बालोद में राजा राव पठार नामक स्थान पर हर वर्ष 10 दिसंबर "शहीद दिवस "के रूप में मनाया जाता है जिसमें  गोंड जाति तथा अन्य आदिवासियों के द्वारा एक भव्य मेले का किया जाता है तथा अपनी परम प्रेम संस्कृति एवं परंपरा के साथ इस मेले का आयोजन किया जाता है!



 

 यह भी पढ़े : राजा राव पठार 

shahid-veer-narayan-smarak,shahid-veer-narayan-smarak-raja-raw-pathar
शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक राजा राव पठार


राजा राव पठार मेला  बालोद
राजा राव पठार बालोद

Monday, January 28, 2019

Raja Raw Pathara Mela /राजा राव पठार मेला

Raja Raw Paathar Mela /राजा राव पठार मेला 
राजा-राव-पठार
राजा राव पठार बालोद


    छत्तीसगढ़ राज्य के बालोद जिला में धमतरी जगदलपुर नेशनल हाईवे  पर स्थित धमतरी से 15 किलोमीटर  एवं रायपुर से 98 किलोमीटर  दूर स्थित एक पठार जो की आदिवासी का एक महोत्सव जो  शीतकालीन ऋतु मे छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्र शहीद  वीर नारायण सिंह  की  याद में  मनाया जाने वाला  एक बहुत ही उत्साह जनक एवं एकजुटता का परिचय देता है!   अधिकांशत दिसंबर माह के प्रथम व द्वितीय सप्ताह में मनाने जाने वाला यह महोत्सव है!

 यह भी पढ़ें: शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी


          राजा राव पठार  मेला आदिवासियों की संस्कृति पहनावा रीति रिवाज तथा अपने इष्ट देवी देवताओं को अर्पित एक अलौकिक सम्मान जो कि आदिवासियों की निष्ठा परंपरा एवं उत्साह को दर्शाता है यह बहुत ही भव्य एवं उत्साह पूर्ण आदिवासी  महासभा को दर्शाता है यहां आसपास के गांव के सभी आदिवासी ग्रामीण भाई बहन मिलकर इस महोत्सव को मनोरम एवं उत्साह प्रदान करते हैं यहां वे अपनी  इष्ट देवी देवताओं को लाते हैं और सभी गांव के देवी देवताओं का मेल मिलाप एवं प्राण प्रतिष्ठा किया जाता है जोकि आदिवासियों के लिए किसी पर्व से कम का प्रतीत नहीं होता!


राजा राव पठार की  भव्यता
    राजा राव पठार की  भव्यता इसी बात से लगाए जा सकते हैं कि यह पूरे संभाग तथा प्रदेश  के आदिवासियों का एक बहुत ही पवित्र स्थान माना जाता है एवं आसपास के सभी आदिवासियों को आमंत्रण एवं निमंत्रण दिया जाता है सभी आदिवासी यहां उपस्थित होते हैं एवं विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है एवं अपने कला संस्कृति एवं परंपराओं का प्रदर्शन किया जाता है! यहां आए हुए सभी   आदिवासियों  उत्साह एवं रोमांच बहुत ही अद्भुत होता है!

 

Friday, January 18, 2019

WORK IS WORKSHIP

किसी समस्या को लेकर  आपकी गंभीरता आपके कामों से दिखती है नाकी सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड करने से!
 काम ही आप का परिचय देते हैं!